सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ फोटो ने खोला साइबर ठगी के म्यूल बैंक खातों का राज, 16 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा
सागर। सागर पुलिस ने साइबर अपराध और साइबर ठगी के लिए म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क संचालित करने वाली गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। जांच में 16 से अधिक फर्जी फर्मों के नाम से बैंक खाते खुलवाकर करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन किए जाने का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक वित्तीय जांच में इन खातों से 5 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन सामने आए हैं।
कार्रवाई के दौरान पुलिस को एक अन्य बड़ी सफलता भी मिली। हथियारों की तलाश में पहुंची पुलिस के सामने करीब 3 करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई। नकदी इतनी अधिक थी कि नोटों की गिनती के लिए मशीन मंगानी पड़ी। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ आरोपियों के फोटो सामने आने के बाद पुलिस की जांच आगे बढ़ी और इसी दौरान म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क का खुलासा हुआ।
पुलिस अधीक्षक सागर अनुराग सुजानिया के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीना जयवीर सिंह भदौरिया एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर नरेंद्र सोलंकी के मार्गदर्शन में थाना मकरोनिया पुलिस ने यह कार्रवाई की।
दस्तावेजों का दुरुपयोग कर खुलवाया फर्जी खाता
13 अगस्त को थाना मकरोनिया में रोहित पिता रूपराज पटेल ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी फर्म तैयार की गई और उसके आधार पर फेडरल बैंक, मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट खुलवाया गया।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने बैंक खाते का परीक्षण कर तकनीकी और आर्थिक विश्लेषण शुरू किया। जांच में सामने आया कि रोहित के नाम से ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ नामक फर्म तैयार कर करंट अकाउंट खुलवाया गया था। इस खाते में फरवरी 2026 से अब तक करीब छह माह की अवधि में लगभग 90 लाख रुपये का लेन-देन पाया गया।
बेरोजगार युवाओं को कमीशन का लालच देकर बनाते थे म्यूल अकाउंट
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित कर बैंक खातों में हुए लेन-देन, संबंधित फर्मों, बैंकिंग चैनल और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। जांच के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सामने आया कि गिरोह के सदस्य बेरोजगार एवं सामान्य लोगों को कमीशन और आसान कमाई का लालच देकर उनके आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज हासिल करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम से फर्जी फर्में तैयार की जाती थीं और विभिन्न निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे।
इसके बाद इन खातों का नियंत्रण गिरोह अपने हाथ में लेकर उन्हें म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करता था। इन खातों के जरिए साइबर ठगी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों से प्राप्त रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजकर उसका सर्कुलेशन किया जाता था।
16 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा
पुलिस की जांच में अब तक 16 से अधिक फर्जी फर्मों का पता चला है। इन फर्मों से जुड़े बैंक खातों के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में 5 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक के लेन-देन की जानकारी सामने आई है। पुलिस द्वारा सभी खातों के लेन-देन का विस्तृत तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस फर्जी फर्मों के पंजीयन और संबंधित बैंक खातों को खुलवाने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्मों के पंजीयन और बैंक खातों के संचालन में किन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं की भूमिका रही।
जांच में किसी व्यक्ति या संस्था की लापरवाही अथवा आपराधिक संलिप्तता सामने आने पर उसके खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, फरार तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस की नागरिकों से अपील
मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या आसान कमाई के लालच में किसी अन्य व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी या अन्य बैंकिंग जानकारी उपलब्ध न कराएं।
किसी दूसरे व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से फर्म या बैंक खाता खुलवाकर उसका संचालन किसी अन्य को सौंपना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। यदि ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी या किसी अन्य अपराध से प्राप्त रकम के लेन-देन में किया जाता है, तो खाताधारक भी पुलिस जांच के दायरे में आ सकता है।
पुलिस ने नागरिकों से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को देने और साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की अपील की है।

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