भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत सागर के संयुक्त तत्वावधान में गुरुपूर्णिमा का पावन पर्व, पर्ल पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल सागर में व्यास पूजन एवं गुरु वंदन कर मनाया गया



गुरु का ज्ञान ही जीवन की राह सरल बनाता- डॉ. जयंत दुबे 

भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत सागर के संयुक्त  तत्वावधान में गुरुपूर्णिमा का पावन पर्व, पर्ल पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल सागर में व्यास पूजन एवं गुरु वंदन कर मनाया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंच संचालन कर रहे अनुराग बृजपुरिया ने मंचासीन अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन तथा भारत माता और मां सरस्वती की प्रतिमाओं पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर किया गया। इसके उपरांत ध्येय श्लोक अनुराग बृजपुरिया और ध्येय वाक्य डॉ. धर्मेन्द्र शर्मा द्वारा वाचन किया।

धर्मेन्द्र शर्मा ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि गुरुपूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, अपितु गुरु-शिष्य अंतर्संबंध एवं भारतीय संस्कारों पर विचार है। भारतीय शिक्षण मंडल वर्ष 1969 से भारतीय मूल्यों को शिक्षा से जोड़ने का सतत प्रयास कर रहा है। हमें गुरुत्व और शिष्यत्व की भावना को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में जो नवाचार हुए हैं, वे भारतीय शिक्षण मंडल के प्रयासों का ही परिणाम हैं।
मुख्य वक्ता डॉ जयंत दुबे जी ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में कहा कि गुरु को ईश्वर तुल्य बताया एवं हम सब अपने गुरु का व्यास पूजन के माध्यम से उनके तप, त्याग और मार्गदर्शन का सम्मान करते हैं। डॉ. जयंत जी ने दो कहानियां के मध्यम से बच्चों को गुरु महिमा का वर्णन किया। भारतीय शिक्षण मंडल न केवल शिक्षा के पुनर्जागरण का कार्य कर रहा है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में इसके स्पष्ट प्रभाव भी देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान अत्यंत वैज्ञानिक था, लेकिन औपनिवेशिक प्रभावों ने उसे नष्ट करने का प्रयास किया। आज आवश्यकता है कि हम वेदों और शास्त्रों में निहित उस वैज्ञानिक चेतना को पुनः पहचानें।

अध्यक्षीय उद्बोधन के रुप में डॉ. राजू टंडन ने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से भारतीय शिक्षण मण्डल प्रयासों के बारे में बताया। डॉ. राजू टंडन ने बताया कि "गुरु" का अर्थ *अंधकार से प्रकाश अर्थात गुरु ही हमें अज्ञानता से ज्ञान* की ओर अग्रसर करते है। उन्होंने कहा बच्चों को गायत्री मंत्र याद करना चाहिए और सुबह सूर्योदय को जल अर्पित करना चाहिए। गुरु+मां अर्थात सर्वप्रथम मां ही पूर्ण गुरु है तत्पश्चात गुरु ही पूर्ण मां है। तीनों शब्दों को मिलाकर बनता है *गुरु पूर्णिमा* का मूल अर्थ बच्चों को समझाया।
कार्यक्रम के समापन में प्रार्थना और कल्याण मंत्र डॉ. शारदा विश्वकर्मा द्वारा किया गया ।

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