सागर / स्वयं को कलेक्टर सागर का पी ए बताकर अपर कलेक्टर सागर के नाम से फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर, लोगों की नियुक्ति कलेक्टर कार्यालय में कराने का छल करके राशि हड़पने वाले आरोपी ठग को सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश समरेश सिंह की अदालत में 4 वर्ष का सश्रम कारावास तथा 10 हजार का जुर्माना कर आरोपी को जेल भेजा गया। तथा अन्य दो आरोपियों को न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किया गया है ।
उक्त प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी करने वाले अपर लोक अभियोजक दीपक पौराणिक ने बताया कि थाना कैंट के प्रकरण वरुण सेन व अन्य में उक्त फैसला सुनाया गया। जिसमें उन्होंने बताया कि दिनांक 31.05.2024 को फरियादियों रेखा भारती ने आरोपी के विरुद्ध थाना कैंट में एक लिखित आवेदन दिया जिस पर एफ आई आर लेख की गई ।
आरोपी वरुण से उसके घर आया स्वयं को कलेक्टर सागर का पी ए बताया और आवेदिका के बच्चों रिश्तेदारों को नौकरी कलेक्टर कार्यालय तथा सरकारी विभागों में लगाने की बात की । जिसके संबंध में आरोपी द्वारा आवेदिका के परिजनों रिश्तेदारों से 1,85,000 नगद तथा फोन पे से लिए । तथा कलेक्टर कार्यालय सागर का एक आदेश बनाकर अपर कलेक्टर रही सपना त्रिपाठी के हस्ताक्षर करके उसकी छायाप्रति आवेदिका की पुत्री शिवानी अहिरवार के नाम से दिया गया । कलेक्टर कार्यालय जाने पर आदेश नकली है यह जानकारी उनको तब ही हुई, साथ ही इसी मामले में पुलिस अधीक्षक रहे अभिषेक तिवारी के तथा एडिशनल एस पी के भी हस्ताक्षर करके दस्तावेज तैयार करकरे आरोपी द्वारा उपयोग किया गए । आरोपी वरुण सेन को धारा 420 भारतीय दंड संहिता में 4 वर्ष का कारावास तथा दस हजार जुर्माने करते हुए केंद्रीय जेल सागर भेजा गया । अभियोजक द्वारा बताया गया कि हमने एस प्रकरण में कुल 25 साक्षियों बयान कराते हुए 75 दस्तावेज प्रदर्शित कराये है।
हालांकि सूत्रों की माने तो आरोपी इस तरह के काम करने का आदि है। उसे किसी भी प्रकार का भय नहीं है। और उसके खिलाफ इस तरीके के कई मामले थाने में दर्ज हैं। बताया जरहा है कि कोतवाली थाने में भी उसके खिलाफ इसी प्रकार का मामला दर्ज है ।

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