मध्यप्रदेश में वनविभाग द्वारा गिद्धों की गणना का कार्य प्रारंभ हो चुका है । जो कि (Vulture Census) अब अत्याधुनिक तकनीकों के साथ की जा रही है। 2026 की गणना के अनुसार, यह कार्य प्रमुख रूप से मोबाइल ऐप (Epicollect5) के माध्यम से, क्षेत्रिय कर्मचारियों फॉरेस्ट गार्ड और रेंजर्स द्वारा, दूरबीन, कैमरे की मदद से और सुबह सूर्योदय के समय की जा रही है । यह गणना दो चरणों में, मुख्य रूप से ठंड और गर्मियों के दौरान की जाती है। विश्वभर में पाई जाने वाली गिद्धों की 23 प्रजातियों में से नौ भारत में पाई जाती हैं। जो कि मध्य प्रदेश में इनमें से सात प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें चार स्थानीय और तीन प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं ।
गिद्धों की गणना के लिये प्रथम बार ऑनलाइन ऐप तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से गिद्धों की गणना की जा रही है। ऐप के माध्यम से गणना किये जाने पर आंकड़ों के संकलन एवं रिपोर्ट तैयार करने में आसानी होगी। गत वर्षों में गणना ऑफलाइन की जाती रही है। ऐप के माध्यम से गणना किये जाने के लिये मास्टर ट्रेनर्स,अशासकीय संस्थाओं एवंअधिकारियों, कर्मचारियों को ऑनलाईन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। यह गणना का कार्य प्रदेश के सभी वन विभाग के 63 वन मण्डलों में किया जायेगा ।
मध्य प्रदेश में प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना की शुरुआत वर्ष-2016 से की गई थी, जिसमें 7,028 गिद्धों का आंकलन किया गया था। गिद्ध गणना वर्ष-2025 में शीतकालीन गणना में 12,710 एवं ग्रीष्मकालीन गणना वर्ष-2025 में 9509 गिद्धों का आंकड़ा प्राप्त हुआ था। प्रदेश में कुल 07 प्रजातियों के गिद्ध पाये जाते हैं, जिसमें से 04 प्रजातियों स्थानीय हैं एवं 03 प्रजातियाँ प्रवासी हैं, जो ठंड के समाप्त होते ही वापस चली जाती हैं। प्रथम चरण की गणना तब की जाती है जब उपरोक्त सभी प्रजातियों के गिद्ध घोंसले बनाकर अपने अंडे दे चुके होते हैं या देने की तैयारी में होते हैं। इसी प्रकार से फरवरी माह आने तक इन घोंसलों में अंडों से नवजात गिद्ध निकल चुके होते हैं तथा वे उड़ने की तैयारी करते होते हैं। इसलिये गणना करने के लिये शीत ऋतु का अंतिम समय उचित होता है जिससे स्थानीय तथा प्रवासी गिद्धों की गणना हो जाए।

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