सागर/ म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार दिनाँक 14/03/2026 को जिला न्यायालय एवं समस्त तहसील न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।
नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रातः 10.30 बजे ए.डी.आर. सेंटर भवन, जिला न्यायालय परिसर सभागार में प्रदीप सोनी, विशेष न्यायाधीश महोदय द्वारा किया गया। इस मौके पर जिला स्थापना पर पदस्थ समस्त न्यायाधीशगण के साथ अध्यक्ष अधिवक्ता संघ जितेन्द्र सिंह राजपूत, राजेश पाण्डे सदस्य राज्य अधिवक्ता परिषद एवं रश्मि रितु जैन सदस्य राज्य अधिवक्ता परिषद के साथ बड़ी संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित रहे।
उक्त कार्यक्रम में जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारियों सहित बैंकों, बीमा कंपनियों एवं अन्य विभागों के अधिकारीगण एवं अधिवक्तागण भी उपस्थित रहे।
उक्त नेशनल हेतु जिला न्यायालय सहित तहसील न्यायालयों हेतु कुल 48 खण्डपीठों का गठन किया गया था जिसमें जिला न्यायालय हेतु कुल 20 खण्डपीठों का गठन किया गया था। जिसमें समस्त पीठासीन अधिकारियों द्वारा प्रकरण का निराकरण किया गया।
लोक अदालत में जिला न्यायालय स्थापना द्वारा कुल 1656 प्रकरणों का निराकरण किया गया जिसमें राशि रूपये 8,47,06,677/ का अवार्ड किया गया। खण्डपीठों के समक्ष प्रस्तुत प्री-लिटिगेशन प्रकरणों में से कुल 2598 प्रकरण निरीकृत हुए जिसमें कुल राशि रूपये 3,80,30,540 /- विभागों / बैंकों में नियमानुसार जमा कराई गई।
उक्त प्रकरणों में मोटर दुर्घटना के 93 प्रकरणों का निराकरण कर क्षतिपूर्ति राशि रूपये 1,55,31,200/- के अवार्ड पारित किए गए, चैक बाउंस के 214 प्रकरणों के निराकरण में कुल राशि रूपये 5,78,75,761/- का समझौता अवार्ड किया गया। आपराधिक प्रकृति के शमनीय 537 प्रकरण, विद्युत के 110 प्रकरण, पारिवारिक विवाद के 129 प्रकरण तथा दीवानी एवं अन्य प्रकृति के 573 प्रकरण का निराकरण किया गया। इनके अतिरिक्त प्री-लिटिगेशन प्रकरणों में विभिन्न बैंकों के 288 प्रकरण, विद्युत विभाग के 1130 प्रकरण, नगर निगम के 704 प्रकरण एवं अन्य प्रकृति के 476 प्रकरणों का निराकरण भी किया गया, जिसमें राशि रूपये 3,80,30,540/- का राजस्व प्राप्त हुआ।
वर्षों से आपसी विवाद के कारण पृथक रह रहे दंपत्ति हुए एक
अखिलेश मिश्रा, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय द्वारा उनके न्यायालय में लंबित प्रकरण क्रमांक एम.जे.सी.आर. 199/2024 अंतर्गत धारा 144 बी.एन.एस.एस. में आवेदिका व अनावेदक के मध्य पिछले 02 वर्षों से विवाद चल रहा था। उक्त प्रकरण में खण्डपीठ के पीठासीन अधिकारी अखिलेश मिश्र द्वारा दोनों पक्षों को पृथक-पृथक सुलहवार्ता कराई गई जिसके फलस्वरूप दोनों पक्षों में राजीनामा के माध्यम से प्रकरण का निराकरण हुआ और दोनों साथ रहने के लिये राजी हुये।
राजेश सिंह, नवम जिला एवं अपर सत्र न्यायधीश द्वारा उनके न्यायालय में लंबित प्रकरण क्रमांक आर.सी.एस.एच.एम. 176/2025 में दोनों पक्षों का 16 वर्ष पूर्व विवाह हुआ था जिसमें पति की शराब पीने की आदत के कारण लगभग दोनों 06 वर्षों से पृथक-पृथक रह रहे थे। माननीय पीठासीन द्वारा दोनों पक्षों के मध्य मध्यस्थता कराये जाने के फलस्वरूप दोनों पक्षों में राजीनामा के माध्यम से प्रकरण का निराकरण हुआ और दोनो साथ रहने के लिये राजी हुये।
रोहित शर्मा, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के न्यायालय में लंबित प्रकरण क्रमांक एम.जे.सी.आर. 58/2021 अंतर्गत धारा 125 द.प्र.सं. में आवेदिका व अनावेदक के मध्य पिछले 07 वर्षों से विवाद चल रहा था। उक्त प्रकरण में खण्डपीठ के पीठासीन अधिकारी रोहित शर्मा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्वारा दोनों पक्षों को पृथक-पृथक सुलहवार्ता कराई गई एवं आवेदक की ओर से अधिवक्ता ब्रजेश सिंह लोधी एवं अनावेदक की ओर से अधिवक्ता अनीस खान द्वारा भी अपने-अपने पक्षकारों को सलाह दी गई जिसके फलस्वरूप दोनों पक्षों में राजीनामा के माध्यम से प्रकरण का निराकरण हुआ।
पूजा अहिरवार, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्वारा उनके न्यायालय में लंबित प्रकरण क्रमाँॉक एम.जे.सी.आर. 1042/2025 में पति-पत्नि का 05 वर्ष पूर्व विवाह हुआ था जिसमें तथ्य प्रकट हुआ कि पति कच्ची शराब बनाने का व्यवसाय करता था और स्वयं भी उसका सेवन करता था जिसके कारण दोनों में वाद-विवाद होता था परेशान होकर पत्नि लगभग 18 माहों से अपने पति से पृथक रह रही थी। माननीय पीठासीन अधिकारी द्वारा दोनों पक्षों के मध्य मध्यस्थता कराई गई जिसमें अनावेदक पति राजीखुशी से आवेदिका पत्नि को साथ रखने को तैयार हो गया। जिसके फलस्वरूप दोनों पक्षों में राजीनामा के माध्यम से प्रकरण का निराकरण हुआ और दोनो साथ रहने के लिये राजी हुये।
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