पेयजल स्त्रोत का उपयोग सिंचाई साधन एवं व्यावसायिक उपयोग में बिना अनुमति से नहीं, कलेक्टर ने जिले में निर्बाध जलापूर्ति हेतु दिया आदेश


सागर / कलेक्टर प्रतिभा पाल कलेक्टर ने म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा (3) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जल प्रदाय सुरक्षित रख कर अबाध रखने हेतु सागर जिले के समस्त विकासखण्डों एवं नगरीय/शहरी क्षेत्रों को तत्काल प्रभाव से दिनांक 30/06/2026 तक की अवधि के लिये जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया। उक्त अधिनियम लागू हो जाने से कोई भी व्यक्ति पेयजल स्त्रोत का उपयोग सिंचाई साधन एवं व्यावसायिक उपयोग में बिना अनुमति से नहीं करेगा। जल स्त्रोत हैंडपंप अथवा ट्यूब वैल से 150 मीटर परिधि में अन्य हैंडपंप अथवा ट्यूब वैल का उत्खनन नहीं करेगा। एवं किसी भी निस्तारी तालाब के पानी का उपयोग सिंचाई एवं व्यावसायिक कार्य हेतु नहीं करेगा।
कलेक्टर पाल ने बताया कि जिले में इस वर्ष औसत वर्षा होने के कारण ग्रीष्म ऋतु में पेयजल स्त्रोतों की जल आवक क्षमता घटने की संभावना है, जिसके कारण सागर जिले में पेयजल संकट संभावित है। पेयजल एवं निस्तार हेतु आम जनता को पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु उपाय किया जाना अति आवश्यक हो गया है।

शासकीय विभागों द्वारा खनित नलकूपों को छोड़कर शेष सभी प्रकार के नलकूपों का खनन प्रतिबंधित रहेगा एवं विशेष परिस्थितियों में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की लिखित अनुमति के पश्चात ही नलकूप खनन किया जा सकेगा। इस आदेश के उल्लंघन करने पर वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत दण्डात्मक कार्यवाही की जावेगी। यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।

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