वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में विस्थापन प्रक्रिया तेज, कलेक्टर ने दिए 15 दिन में भुगतान के निर्देश, प्रकरणवार समीक्षा कर पात्र-अपात्र हितग्राहियों का अंतिम निर्धारण करने के निर्देश, परिसंपत्तियों के भुगतान के बाद खसरों के नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करने पर जोर

सागर। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले गांवों के विस्थापन की प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रतिभा पाल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रभावित गांवों के विस्थापन, परिसंपत्तियों के मूल्यांकन एवं भुगतान, पात्र-अपात्र हितग्राहियों के अंतिम निर्धारण तथा लंबित प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक केवी, डीएफओ वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व रजनीश सिंह, भू-अर्जन अधिकारी, एसडीएम देवरी मुनव्वर खान, एसडीएम रहली कुलदीप पाराशर, एसडीओ वन विभाग सहित प्रभावित गांवों के ग्रामीण उपस्थित रहे।

प्रकरणवार की गई समीक्षा कलेक्टर ने ग्राम अरसी, देवलपानी, पटना मोहली, खपराखेड़ा, केरपानी, झमरा और पुटदेही सहित अन्य प्रभावित गांवों में पूर्व बैठकों के दौरान जांच के लिए भेजे गए प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने लंबित प्रकरणों में जांच पूरी कर पात्र एवं अपात्र हितग्राहियों का अंतिम निर्धारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने गांव से बाहर निवास करने वाले परिसंपत्ति धारकों के मामलों में भी नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

संदिग्ध प्रकरणों का होगा री-वेरिफिकेशन
कलेक्टर पाल ने कुछ संदिग्ध एवं लंबित प्रकरणों में री-वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए। साथ ही परिसंपत्तियों में अंतर से संबंधित जानकारी तथा हितग्राहियों के बैंक खातों की सटीक जानकारी निर्धारित समय सीमा में संकलित करने को कहा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 15 दिवस के भीतर आवश्यक जानकारी का कलेक्शन पूरा कर पात्र हितग्राहियों को मुआवजा भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
भुगतान के बाद खसरों के नामांतरण की प्रक्रिया होगी पूरी बैठक में केसली, खमरापठार, आंखीखेड़ा, सर्रा (अरई) और झमरा गांवों में परिसंपत्तियों का भुगतान करने के बाद राजस्व एवं निजी खसरों को वन विभाग के पक्ष में नामांतरित करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने पर भी जोर दिया गया।

कलेक्टर ने कहा कि विस्थापन प्रक्रिया में प्रभावित ग्रामीणों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाए और पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार समय पर मुआवजा मिले। उन्होंने जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।

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