सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी), सागर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने एक जटिल एवं उच्च जोखिम वाली शल्य चिकित्सा को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने 70 वर्षीय महिला के पेट से लगभग 1 किलोग्राम वजनी एवं 15×20 सेंटीमीटर आकार की विशाल एडनेक्सल (ओवेरियन) सिस्ट को सफलतापूर्वक निकालकर उन्हें नया जीवन प्रदान किया।
बड़ा बाजार निवासी मुन्नी बाई (70), पत्नी भगवान दास लंबे समय से पेट में लगातार दर्द और सूजन की समस्या से परेशान थीं। जांच के दौरान उनके पेट एवं श्रोणि (एब्डोमिनोपेल्विक) क्षेत्र में बड़ी गांठ पाई गई। अल्ट्रासाउंड एवं सीईसीटी जांच में इसे एडनेक्सल सिस्ट के रूप में चिन्हित किया गया।
मरीज पिछले चार वर्षों से क्रॉनिक डायरिया से भी पीड़ित थीं, जिसके कारण यह सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण और उच्च जोखिम वाली मानी जा रही थी। ऑपरेशन से पहले विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सभी आवश्यक परीक्षण कर मरीज की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया तथा हाई-रिस्क कंसेंट लेने के बाद ऑपरेशन की तैयारी की।
18 जुलाई 2026 को प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शीला जैन के नेतृत्व में सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रियंका पटेल, डॉ. सिफ्टी बंगा, स्नातकोत्तर छात्रा डॉ. रिंशु सुजोरिया, स्क्रब नर्स राखी गौतम एवं आकांक्षा वर्मा की टीम ने एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी के माध्यम से दाहिनी ओर स्थित विशाल सिस्ट को सफलतापूर्वक निकाल दिया।
इस जटिल शल्य चिकित्सा को सफल बनाने में एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. सर्वेश जैन एवं उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कुशल एनेस्थीसिया प्रबंधन और ऑपरेशन के दौरान सतत मॉनिटरिंग के कारण पूरी प्रक्रिया सुरक्षित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी सामान्य रही और उपचार पूर्ण होने पर उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हाल ही में हुए फॉलो-अप परीक्षण में मरीज पूरी तरह स्वस्थ, दर्दमुक्त एवं स्थिर पाई गईं।
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. पी.एस. ठाकुर ने इस सफलता पर प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, एनेस्थीसिया विभाग तथा पूरी चिकित्सकीय टीम को बधाई देते हुए कहा कि बीएमसी में अनुभवी विशेषज्ञों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के बल पर अब जटिल एवं उच्च जोखिम वाली सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा रही हैं। उन्होंने इसे संस्थान की गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, आधुनिक उपचार प्रणाली और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
यह उपलब्धि न केवल बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। इससे यह संदेश भी जाता है कि अब क्षेत्रीय स्तर पर ही जटिल एवं उच्च जोखिम वाली शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक संभव है, जिससे मरीजों को बड़े महानगरों की ओर रुख करने की आवश्यकता कम होगी।

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