कूनो के बाद अब गांधीसागर में फर्राटे भरेगी मादा चीता 'सीसीबी2', मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे जंगलों में विमुक्त, मध्य प्रदेश में तेजी से आकार ले रहा 'प्रोजेक्ट चीता'; अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़कर हुई 4

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में लगातार नए आयाम छू रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को बोत्सवाना से भारत लाई गई मादा चीता 'सीसीबी2' को गांधीसागर अभयारण्य के जंगलों में विमुक्त करेंगे।

गांधीसागर में इस नई मादा चीता के आगमन के साथ ही अभयारण्य में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 4 (2 नर और 2 मादा) हो जाएगी। इससे क्षेत्र में चीता संरक्षण, पुनर्स्थापना और वंश वृद्धि के प्रयासों को बड़ी गति मिलेगी।
बोत्सवाना से कूनो और अब गांधीसागर तक का सफर
मादा चीता सीसीबी2 को बोत्सवाना के घांजी से 28 फरवरी 2026 को श्योपुर स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाया गया था। अनिवार्य क्वारंटीन अवधि पूरी करने के बाद मई 2026 में इसे कूनो के खुले जंगलों में छोड़ा गया। सीसीबी2 ने भारतीय परिस्थितियों और यहाँ के वन्य परिदृश्य से बेहद सहजता से तालमेल बिठाया। कूनो के पारिस्थितिक तंत्र में पूरी तरह ढलने के बाद अब इसे गांधीसागर अभयारण्य में स्थानांतरित किया जा रहा है।

गांधीसागर में पहले से मौजूद हैं तीन चीते
गांधीसागर अभयारण्य में पहले से मौजूद चीते—प्रभाष, पावक और धीरा—इस नई मादा चीता का इंतजार कर रहे हैं। सीसीबी2 भारत में चीतों की नई पीढ़ी की उम्मीद बनकर आई है। बोत्सवाना से कूनो और अब कूनो से गांधीसागर तक का इसका सफर भारत में वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन के एक नए अध्याय की शुरुआत है।

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