बंडा शराबकांड: 'दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाएगा' – पीड़ितों के घर पहुंचे प्रियंक कानूनगो, पुलिस कार्रवाई पर जताई सख्त नाराजगी

सागर। बंडा शराबकांड में दो दर्जन से अधिक लोगों की असमय मौत और सैकड़ों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाने के बाद यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो मंगलवार को पीड़ितों और उनके परिजनों का हाल जानने सागर पहुंचे। उन्होंने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य ओंकार सिंह, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल कल्याण समिति के सदस्यों के साथ प्रभावित गांवों का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रशासनिक और पुलिस महकमे की गंभीर लापरवाही पर जमकर क्लास ली और खामियों को नजरअंदाज न करते हुए दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दे दिया।
कानूनगो बंडा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम जगथर और गूगरा पहुंचे, जहां उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उनका दुख बांटा। परिजनों से बातचीत के दौरान पुलिस की ढिलाई उजागर हुई, जब यह बात सामने आई कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने अब तक पीड़ितों के बयान तक दर्ज नहीं किए हैं। जब उन्होंने पुलिस एसडीओपी से इस बारे में सवाल किया तो पुलिस अधिकारी निरुत्तर हो गए। इसके साथ ही जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि अस्पताल में इलाज के दौरान भर्ती रहे किसी भी मरीज के मरणासन्न कथन (दाइंग डिक्लेरेशन) दर्ज नहीं किए गए थे। इस पूरी कार्यशैली पर गहरा आक्रोश जताते हुए उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि पुलिस की यह ढिलाई मामले को कमजोर कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ग्राम जगथर में मृतक अजय लोधी की मां से मुलाकात के दौरान ग्रामीणों ने खुले तौर पर गांव में शराब बेचने वालों के नामों का खुलासा किया। ग्रामीणों ने बताया कि आरोपियों की पहचान होने के बाद भी उन पर कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। इस पर प्रियंक कानूनगो ने मौके पर मौजूद एसडीओपी रोहित लखेरे को निर्देश दिए कि मृतक की मां की शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और चौबीस घंटे के भीतर सभी परिजनों के बयान दर्ज किए जाएं।
हादसे में अनाथ हुए बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कानूनगो ने बाल कल्याण समिति को प्रभावित गांवों में विशेष बेंच लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर जरूरतमंद बच्चे को तत्काल शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाए ताकि उनकी पढ़ाई, परवरिश और जीवन-यापन में कोई बाधा न आए। इसके बाद उन्होंने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) का दौरा कर भर्ती मरीजों का हालचाल जाना और बीएमसी अधीक्षक डॉ. राजेश जैन को मरीजों के समुचित और बेहतर इलाज के निर्देश दिए।

इससे पूर्व सर्किट हाउस में कलेक्टर प्रतिभा पाल और एसपी अनुराग सुजानिया के साथ बैठक करते हुए प्रियंक कानूनगो ने मामले की पूरी जानकारी ली और अपराधियों पर नकेल कसने के निर्देश दिए। ग्रामीणों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि नशा एक गंभीर सामाजिक बुराई है। शासन-प्रशासन अपने स्तर पर सख्त कार्रवाई तो कर ही रहा है, लेकिन अपने परिवार और गांव को नशामुक्त बनाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि ग्रामीण एकजुट होकर जागरूक हो जाएं, तो किसी की हिम्मत नहीं होगी कि वह गांव में नशे का अवैध कारोबार कर सके।

इस दौरान किशोर न्याय बोर्ड की वंदना तोमर, चंद्रप्रकाश शुक्ला, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष किरण शर्मा, सुरेंद्र सेन, ओंकार सिंह, एसडीएम संजय जैन, तहसीलदार मोहित जैन, थाना प्रभारी आनंद सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। 

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