बण्डा जहरीली शराब काण्ड: पूर्व मंत्री सुरेन्द्र चौधरी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखा पत्र, कलेक्टर-एसपी को तत्काल हटाने की मांग: पूर्व मंत्री ने कहा कि ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति सिर्फ कागजों तक सीमित है, न्यायिक जांच की जरूरत: जहरीली शराब के पूरे नेटवर्क और इसके वास्तविक स्रोत का पर्दाफाश स्वतंत्र न्यायिक जांच से ही संभव है

सागर जिले के बण्डा क्षेत्र में जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की दुखद घटना को लेकर पूर्व मंत्री सुरेन्द्र चौधरी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक अथवा प्रदेश स्तरीय उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
चौधरी ने कहा कि अवैध शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ सरकार की घोषित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है और सागर में यह कारोबार जारी रहना गंभीर प्रशासनिक विफलता है। उन्होंने सवाल उठाया कि लंबे समय से शिकायतें मिलने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह जांच का प्रमुख विषय है।

चौधरी ने मुख्यमंत्री से सागर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को तत्काल हटाने की मांग करते हुए कहा कि जिस प्रशासनिक व्यवस्था के रहते इतनी गंभीर घटना हुई, उसी के अधीन निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। उन्होंने घटना की जांच के लिए नियुक्त डिप्टी कलेक्टर नवीन सिंह ठाकुर को भी जांच से पृथक करने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि ठाकुर पूर्व में लंबे समय तक शाहगढ़ में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के पद पर रहे हैं, इसलिए उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके शाहगढ़ कार्यकाल की भी पूरी जांच कराई जानी चाहिए।

पुलिस अधीक्षक द्वारा शराब उत्तर प्रदेश से लाए जाने के दावे पर सवाल उठाते हुए पूर्व मंत्री ने शराब के वास्तविक स्रोत, निर्माण, परिवहन, आपूर्ति और स्थानीय वितरण नेटवर्क की स्वतंत्र जांच की मांग की है। 7 और 8 सितंबर को बण्डा क्षेत्र के प्रभावित परिवारों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात के दौरान अवैध कारोबार से जुड़ी कई गंभीर जानकारियां सामने आई हैं, जिनकी सूक्ष्मता से जांच होना आवश्यक है।

इसके अलावा, चौधरी ने प्रभावितों के इलाज के दौरान Fomepizole जैसी जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने 5 सितंबर 2026 से अस्पतालों के दवा स्टॉक, वितरण रजिस्टर, इंडेंट, खरीद संबंधी अभिलेख और मरीजों के उपचार रिकॉर्ड की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की बात कही।
उन्होंने ध्यान दिलाया कि सागर जिले के बहेरिया, कैंट, मोतीनगर, मकरोनिया, गोपालगंज तथा मारा बड़ोदरा में पूर्व में भी अवैध शराब की बिक्री और फैक्ट्रियां पकड़े जाने के मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद यदि अवैध शराब का नेटवर्क सक्रिय रहा, तो पुलिस, आबकारी और प्रशासन की भूमिका की भी जांच जरूरी है।

अंत में, पूर्व मंत्री ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जहरीली शराब के कारोबार से जुड़े लोगों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही मृतकों के परिजनों को उचित आर्थिक मुआवजा, पीड़ितों को समुचित इलाज और प्रभावित परिवारों को आवश्यक प्रशासनिक व कानूनी सहायता जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए। 

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