"V.विलियर्स को बदनाम करने की साजिश!" — कर्मचारियों ने पुलिस महाधिक्षक ऑफिस पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार, बोले- 'धीरज कुर्मी खुद खा चुका है लाखों की सैलरी

"V.विलियर्स को बदनाम करने की साजिश!" — कर्मचारियों ने पुलिस महाधिक्षक ऑफिस पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार, बोले- 'धीरज कुर्मी खुद खा चुका है लाखों की सैलरी'
 
सागर (मध्य प्रदेश)।
शहर की एक नामी कंपनी V.विलियर्स इन दिनों सुर्खियों में है — वजह है उस पर लगे धोखाधड़ी के आरोप। लेकिन अब कंपनी के कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है और सीधे-सीधे आरोप लगाने वालों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मंगलवार को कंपनी में वर्षों से कार्यरत दर्जनों कर्मचारियों ने पुलिस महाधिक्षक कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई और गंभीर खुलासे किए।

कर्मचारियों का दावा — 'धीरज कुर्मी खुद उठा चुका है करीब 9 लाख रुपए'
कर्मचारियों ने कहा कि कंपनी पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाने वाले धीरज कुर्मी कभी खुद उसी कंपनी में बतौर डिस्ट्रीब्यूटर कार्यरत थे। उन्होंने आरोप लगाया कि धीरज कुर्मी को कंपनी की ओर से हर महीने ₹50.000 से ₹60,000 तक का अतिरिक्त फायदा लेता था, और अब तक वह कुल ₹9 लाख रुपए तक का भुगतान कंपनी से ले चुके हैं। कंपनी के कर्मचारियों का दावा है कि धीरज कुर्मी को जो भुगतान हुआ हर महीने उसका बैंक स्टेटमेट से जुड़े हुए पूरे दस्तावेज है ऐसे में सवाल उठता है — जब खुद लाभ लिया, तो अब आरोप क्यों?
मामले में दोहरा मापदंड?
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि 17/07/2025 तारीख को कंपनी की ओर से निर्धारित पेमेंट 60000 कर दिया गया था, और इसका भी प्रमाण है इसके बावजूद पुलिस ने कंपनी के दूसरे डिस्ट्रीब्यूटर पर कार्रवाई कर दी, लेकिन धीरज कुर्मी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि वह भी उसी पद पर थे और लेन-देन में सक्रिय थे। उन्होंने सवाल उठाया कि – "क्या यही न्याय है?"
 और कंप्लेन करता बंदना पटेल जो कि अभी भी कंपनी से जुड़ी हुई है फिर उसके बाद कंपनी के विरोध में एफआईआर क्यों
बंदना के द्वारा बुलाए गए लोगों द्वारा अभी भी काम किया जा रहा है और अच्छा अतिरिक्त भुगतान भी के रहे है फिर ये षडयंत्र क्यों
पूर्व कर्मचारियों पर लगाए साजिश के आरोप
कर्मचारियों ने बताया कि हाल ही में कंपनी छोड़ चुके कुछ लोग—जिनमें धीरज पटेल का नाम भी सामने आया है—अब बदले की भावना से कंपनी की छवि बिगाड़ने में लगे हैं। उन्होंने पुलिस महाअधीक्षक से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि झूठी शिकायतें और साजिश के सबूत मिलें, तो दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

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