डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर की एक और नई पहल, सागर में विकास की असीम क्षमताएं, परन्तु यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है: प्रो. नीलिमा गुप्ता, ‘सागर डायलॉग’ कार्यकम का किया उद्घाटन

सागर/ डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर द्वारा सागर और इसके आसपास के क्षेत्र के विकास को लेकर एक नवाचार परक पहल आरंभ की गई है। इस विश्वविद्यालय ने ‘सागर डायलॉग’ के नाम से एक चर्चा का कार्यक्रम लांच किया है जिसमें सागर और इसके आसपास के क्षेत्र के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञों के साथ वार्ताएं आयोजित करवाई जायेंगी। कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने इस ‘सागर डायलॉग’ कार्यकम का 22 अगस्त 2025 को उद्घाटन करते हुए कहा कि विकास का आयाम और गति दोनों ही समग्र प्रयासों का प्रतिफल होते हैं। उन्होंने कहा कि सागर के युग-पुरूष डॉक्टर सर हरीसिंह गौर द्वारा यहां के विकास के लिये देखा गया सपना अनेक मायनों में साकार हो रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में सागर ने जो पहचान स्थापित की है, यह किसी से छिपी नहीं है। आज यहां अध्ययन करने के लिये कई देशों के साथ साथ भारत के अधिकांश प्रान्तों से विद्यार्थी आ रहे है, यह डॉक्टर सर हरीसिंह द्वारा स्थापित इस विश्वविद्यालय में उनके प्रयासों की ही परिणति है। यहां के पढे हुए लोग देश विदेश में सागर का नाम रोशन कर रहे है।
उन्होंने कहा कि सागर प्राकृतिक सौन्दर्य, एवं ऐतिहासिक धरोहर से परिपूर्ण शहर है। इसके आसपास का क्षेत्र भी असीम संभावनाओं और क्षमताओं से परिपूर्ण है। प्रो. गुप्ता ने कहा कि किसी क्षेत्र के महत्व का आकलन सिर्फ वहां दिखने वाले कंकरीट के महलों की सघनता और यहां के बाजार से नहीं लगा सकते। बल्कि उस क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धता, यहां के मानव संसाधन की सकारात्मकता और रचनात्मकता से इसका आकलन किया जाना चाहिये। इन मानदण्डों पर सागर और इसके आसपास का क्षेत्र अपार संभावनाओं और क्षमताओं वाला क्षेत्र है।
सागर और इसके आसपास के क्षेत्र के विकास में संभावित बाधाओं पर पूछे गये प्रश्न पर उन्होंने कहा कि बाधाएं कभी नहीं होती हैं। यदि कुछ करने की मंशा प्रबल हो तो कोई बाधा दिखाई नहीं देती है। सागर का शहर और इसके आसपास का विकास इसका प्रमाण है कि यहां विकास की सतत गंगा प्रवाहित हो रही है। फिर भी उन्होंने यह अवश्य दोहराया कि सागर और इसके आसपास औद्योगिक इकाइयों और बेहतर रेल कनैक्टिविटी का अभाव है। साथ ही, इसे हवाई यातायात के साथ जोड़े जाने की महती आवश्यकता है, ताकि सागर में बाहर से निवेशक भी आ सकें और इसकी आर्थिक विकास दर को गति मिल सके। साथ स्थनीय स्तर पर रोजगार अवसर भी सृजित होंगे।
विकास के लिये समाज को जोडकर चलने और विश्वविद्यालय के साथ समाज की सहभागिता के बारे में बोलते हुए कहा कि डॉक्टर सर हरीसिंह गौर के जन्मोत्सव का कार्यक्रम सागर शहर के सभी निवासियों तथा विश्वविद्यालय द्वारा सामूहिक रुप में मनाया जाता है। साथ ही, हाल ही में सागर शहर के वरिष्ठ नागरिकों की खुशहाली और स्वस्थता के लिये भी विश्वविद्यालय ने एक पहल करके ‘स्वर्णिम धरोहर’ प्रकोष्ठ स्थापित किया है, जो कि विकास की समाज के साथ चर्चा का भी एक प्लेटफॉर्म है। सागर शहर के निवासियों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिये विश्वविद्यालय द्वारा एक दिवसीय डिस्पेन्सरी सुविधा भी शहर में ही उपलब्ध करवाई जाती है। सागर की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने एवं सर डॉक्टर हरीसिंह गौर के जीवन दर्शन से आने वाली पीढियों और आगंतुकों को परिचित करवाने के लिये विश्वविद्यालय द्वारा ‘गौर संग्रहालय’ स्थापित करवाया गया है, जो सभी के लिये आकर्षण का केन्द्र है।
उन्होने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा अग्निवीरों के लिये विशेष पाठ्यकम आरंभ किये गये हैं, जो कि सामाजिक योगदान की दृष्टि से एक नई पहल है। विद्यार्थियों को भी नियमित डिग्री कोर्सेज के साथ उनमें रोज़गारोन्मुख कौशल विकास के लिये अलग से प्रशिक्षण एवं कोर्स उपलब्ध करवाये जा रहे है। अंत में उन्होंने कहा कि सागर शहर और इसके आसपास क्षेत्र के विकास के लिये सभी वर्गों जिनमें प्रशासन, राजनीतिज्ञ, समाज सेवियों, प्रबुद्धजनों, शिक्षण संस्थानों एवं जनमानस को मिलकर योजना निर्माण और उनकी क्रियान्विति का रोडमैप तैयार करना होगा।
विश्वविद्यालय द्वारा आरंभ इस ‘सागर डायलॉग’ कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज, अध्यक्ष भूगोल विभाग ने इस कार्यक्रम में मॉडरेटर की भूमिका निभाते हुए कार्यक्रम के बारे में बताया कि सागर शहर और इसके आसपास क्षेत्र के विकास हेतु स्थानीय एवं सागर से जुड़े प्रबुद्धजनों के साथ गहन चर्चा हेतु यह एक संयुक्त संवाद प्लेटफॉर्म के रूप में आरंभ किया गया है। इसमे प्रत्येक माह सागर के विकास से जुडे नये आयामों पर चर्चा रिकार्ड करवाई जायेगी, और इस प्रकार की चर्चा का प्रत्येक एपीसोड विश्वविद्यालय के यू-ट्यूब चैनल "गौर+" पर आमजन के लिये अपलोड किया जायेगा। इस परिचर्चा हेतु अधिकांशतः सागर शहर से उन अनुभवी लोगों को आमन्त्रित किया जायेगा, जो इस शहर व इसके आसपास के विकास हेतु योजनाओं से जुड़े रहे हैं और विकास को गति प्रदान करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रो. भारद्वाज ने बताया कि इस कार्यक्रम में सागर के विकास से संबधित जिन मुद्दों को चर्चा में और सम्मिलित किया जाना चाहिये, उन्हें आमजन भी लिखित अथवा ई-मेल द्वारा विश्वविद्यालय को प्रेषित कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में चर्चाओं को केवल विकास केन्द्रित एवं अविवादित, गैर-राजनैतिक मुद्दों पर ही चर्चा के लिये ही सीमित रखा गया है। इस कार्यक्रम का प्रथम एपीसोड शीघ्र ही आमजन को उपलब्ध करवाया जायेगा।
यह कार्यक्रम भूगोल विभाग एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली के सागर विश्वविद्यालय परिसर में स्थित ईएमएमआरसी द्वारा संयुक्त तत्वावधान में आयोजित करवाया जा रहा है।

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