कहानी सच्ची है, दो कुआं, 5 बोर कराए नहीं निकला पानी, किसान ने ढाई किलोमीटर लंबी पाइपलाइन डाली, अब 3 फसल ले रहे

गांव में बांध बना तो उसी से पानी किया लिफ्ट, जिनके खेतों से लाइन गई उन्हें भी दिया पानी

सागर/ जहां चाह-वहां राह 40 वर्षीय किसान रामराजा लोधी ने इसी को अपनी जिंदगी का सूत्र बनाया और आज दर्जनों किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए। मालथौन विकासखंड के हड़ली गांव के किसान रामराजा की खेती गांव से ढाई किलोमीटर दूर है। यहां रामराजा की स्वयं की 20 और उनके परिवार की करीब 100 एकड़ जमीन है। 5 साल पहले तक यहां खेती की स्थिति यह थी कि सबकुछ बारिश पर निर्भर था। दूसरी फसल के रूप चना, गेहूं की खेती करते उसमें भी इतनी पैदावार होती कि बमुश्किल खर्च निकलता। अब स्थिति यह कि दूसरी फसल की उपज पहले से 3 गुना हो गई है। इसके अलावा वे तीसरी फसल भी ले रहे हैं। यह सब बदलाव हुआ रामराजा के उस संकल्प से जिसमें वे ढाई किलोमीटर दूर से पानी यहां लाये। वह भी 2 जगह से लिफ्ट करके। उनके गांव से निकली नदी पानी अपने खेत तक ले जाने के लिए उन्होंने 20-20 फीट के 400 पाइप खरीदे। इस पर 3.20 लाख रुपए खर्च आया। जबकि एक लाख रुपए में दो मोटर और बिजली केबिल भी लीं। यह पूरा इंतजाम वे दाे सालाें में कर पाए। बिजली के दो स्थाई कनेक्शन लिए। दोनों के 3600-3600 रुपए के हिसाब से बिल भी भरते हैं।

 कई बार बिना फसल के ही छोड़ देते थे खेती

रामराजा बताते हैं कि हमने यहां 2 कुआं कराए। उनमें पानी अच्छा नहीं निकला। 5 बोर कराए, वह भी फेल हो गए। स्थिति यह थी कि जब बारिश न हो तो सोयाबीन के बाद गेहूं चना के लिए हम लोग बोवनी तक नहीं करते। कारण था कि लागत ही नहीं निकलती थी।

 प्रति एकड़ 8 क्विंटल गेहूं की उपज थी, अब बढ़कर 25 क्विंटल हुई

रामराजा बताते हैं 5 साल पहले एक एकड़ में गेहूं की बोवनी पर 8 क्विंटल गेहूं की उपज होती थी। जो अब बढ़कर 22 से 25 क्विंटल तक पहुंच गई है। इसी प्रकार चना प्रति एकड़ 5 से 6 क्विंटल होता था, जो अब 10 से 12 क्विंटल तक हो जाता है। ऐसा दो से तीन बार सिंचाई करने से हो पाया है। इसमें स्वयं सिंचाई करने से अतिरिक्त खर्च भी नहीं आता। पहले एक एकड़ में बोवनी पर 40 से 50 किलो गेहूं के 1000 से 1250 रुपए, खाद के 1200 रुपए, जुताई के 500 रुपए, बुआई के 600 रुपए, कटाई के 2500 रुपए सहित 5600 से 5850 रुपए खर्च होते थे। उपज 8 क्विंटल निकलती थी। खर्च अब भी वही है, सिर्फ एक बार और खाद डालने के 500 रुपए करीब और लग जाते हैं। परंतु उपज 3 गुना बढ़ गई है। इससे मुनाफा बढ़ गया है।

 मूंगफली-प्याज की खेती तीसरी फसल के रूप में कर रहे 

पहले जहां रामराजा एक दो फसल की ही खेती कर पाते थे। अब वे तीन फसल ले रहे हैं। उनका कहना है कि यह सब पानी से ही संभव हो पा रहा है। मार्च में गेहूं कटने के बाद खेत खाली था तो सिंचाई कर तीसरी फसल लेने के लिए मूंगफली और प्याज लगा दी थी। यदि पानी नहीं होता तो तीसरी क्या दूसरी फसल तक का नहीं सोच पाते। खेती में सफल होने से ही भूसा बनाने की मशीन, ट्रेक्टर आदि भी खरीद लिए हैं।

 जिनके खेत से लाइन निकली उन्हें दिया पानी, 20 किसानों ने भी अपनाया तरीका

रामराजा बताते हैं नदी से पानी लाने के लिए बिजली कंपनी से दो ट्रांसफार्मर लगवाए। विधिवत अनुमति के बाद पानी ले जाना शुरू किया। 15 किसानों के खेत से पाइपलाइन गुजरी, उनकी सिंचाई के लिए भी पानी देता हूं। इसके अलावा भी जिनको जरूरत होती है, उन्हें भी उपलब्धता अनुसार पानी देता हूं। रामराजा को देखकर गांव और दूसरे गांव के 20 किसानों ने भी ऐसी ही पद्धति अपना ली है और इसी तरह से पानी लिफ्ट कर सिंचाई कर रहे हैं।

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