शिक्षक पात्रता परीक्षा पर पुनर्विचार की मांग को लेकर, लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश तुरंत ही निरस्त करने, शिक्षकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

सागर / मध्यप्रदेश में शिक्षकों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित नियमों एवं विधिक प्रावधानों के अनुरूप विधिवत की गई है। इन शिक्षकों ने बीते 25-30 वर्षों से निष्ठा, समर्पण और कर्तव्यपरायणता के साथ अपनी सेवाएं देते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके अनुभव और शिक्षण कौशल से विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। लंबे समय से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता लागू करना उनके मनोबल को प्रभावित कर रहा है, जिससे व्यापक स्तर पर असंतोष और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो रही है। इसका प्रभाव शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।
 इस विषय की गंभीरता को देखते हुए देश के विभिन्न राज्यों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश शासन से अपेक्षा है कि वह भी संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए आवश्यक विधिक पहल करे।
 हजारों अनुभवी शिक्षकों के भविष्य और हितों को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने की दिशा में शीघ्र कार्यवाही की जाए, जिससे उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके और शिक्षा व्यवस्था में स्थायित्व एवं गुणवत्ता बनी रहे। आज अध्यापक शिक्षक संघ मोर्चा के साथ हजारों की संख्या में शिक्षक कलेक्टर कार्यकाल के बाहर अपनी मांगों को लेक एकत्रित हुए और ज्ञापन सौंपा । जिसमें अध्यापकों की मांगे निम्नलिखित हैं -

( 1) शिक्षकों की TET परीक्षा के संबंध में मध्यप्रदेश के अध्यापकों का निवेदन है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश तुरंत ही निरस्त करने एवं अध्यापकों के पक्ष में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने की कृपा करें। 

(२) अध्यापक शिक्षक संवर्ग की पेंशन,ग्रेजूएटी, और अवकाशों के नगदीकरण में भी उनकी प्रथम नियक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना करने की कृपा करेंगे । 

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