सागर पुलिस ने खोला ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर ठगी के म्यूल अकाउंट नेटवर्क का राज, 2.69 करोड़ नकद और 30 लाख का सोना बरामद, 6 आरोपी गिरफ्तार

 
बेरोजगारों के दस्तावेजों से फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाकर करोड़ों का संदिग्ध लेन-देन करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश — 30 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा 

सागर। साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के खिलाफ सागर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है।  पुलिस ने बेरोजगार एवं सामान्य लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम से फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इन बैंक खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी, साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेन-देन और उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपये नकद, करीब 30 लाख रुपये कीमत का सोना, नोट गिनने की मशीन, कई फर्जी फर्मों के एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में अब तक 30 से अधिक फर्जी फर्मों का पता चला है, जबकि इनसे जुड़े बैंक खातों के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन की जानकारी सामने आई है।

ऐसे सामने आया पूरा मामला

साइबर अपराधों की पतारसी और संदिग्ध बैंक खातों की पहचान के लिए पुलिस अधीक्षक सागर अनुराग सुजानिया के निर्देश पर जिले में लगातार तकनीकी एवं वित्तीय जांच की जा रही है। इसी क्रम में मकरोनिया थाना पुलिस को 13 अगस्त 2026 को रोहित पिता रूपराज पटेल की शिकायत प्राप्त हुई। रोहित ने पुलिस को बताया कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी फर्म बनाई गई और फेडरल बैंक की मकरोनिया शाखा में उसके नाम से करंट अकाउंट खोल दिया गया।

पुलिस ने खाते की जांच की तो सामने आया कि ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ नाम से फर्म बनाकर खाते का संचालन किया जा रहा था। फरवरी 2026 से लगभग छह माह की अवधि में इस खाते से करीब 90 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर नरेन्द्र सोलंकी के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी मकरोनिया नितिन पाल के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने बैंक खातों, फर्मों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन का गहन विश्लेषण शुरू किया। 
बेरोजगारों को लालच देकर खुलवाते थे खाते

जांच के दौरान पुलिस ने धर्मेन्द्र नाहर और सोनू दांगी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बेरोजगार और सामान्य व्यक्तियों को कमीशन एवं आसान कमाई का लालच देकर उनके आधार सहित अन्य दस्तावेज हासिल करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में तैयार कर निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे।

इसके बाद बैंक खातों का नियंत्रण गिरोह के सदस्य अपने हाथ में ले लेते थे। इन खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल कर ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर ठगी से प्राप्त रकम का लेन-देन एवं सर्कुलेशन किया जाता था।

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि धर्मेन्द्र नाहर ने अपने स्थानीय साथी सोनू दांगी तथा अन्य आरोपियों के साथ मिलकर इस नेटवर्क को आगे बढ़ाया। गिरोह के तार भोपाल और अन्य शहरों से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई है।

ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा

जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी रिषभ पटेल ऑनलाइन बेटिंग का संचालन करता था। पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपये नकद और करीब 30 लाख रुपये कीमत का सोना बरामद किया।
पूछताछ में रिषभ ने बताया कि फर्जी फर्मों के बैंक खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को ट्रांसफर करने और बाद में नकदी निकालने के लिए किया जाता था। ग्राहकों से संपर्क और ऑनलाइन सट्टेबाजी के संचालन के लिए टेलीग्राम समेत अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी पुलिस को मिली है।

पुलिस ने आरोपियों से मिले डिजिटल एवं वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। गिरफ्तार आरोपी अमित विश्वकर्मा और रिषभ पटेल को न्यायालय से 8 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। दोनों से नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के संबंध में पूछताछ की जा रही है।

30 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा

पुलिस की जांच में अब तक 30 से अधिक फर्जी फर्मों का पता चला है। प्रारंभिक जांच में सामने आई फर्मों में ग्लैमर इंटरप्राइजेस, भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस, सूर्या इंटरप्राइजेस, समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स, लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर, कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार इंटरप्राइजेस, राजपूत इंटरप्राइजेस, अनुभव ट्रेडर्स, सागर ट्रेडर्स, शर्मा जी इंटरप्राइजेस, सौरभ इंटरप्राइजेस, माखन इंटरप्राइजेस, अंकेश इंटरप्राइजेस, तनविक इंटरप्राइजेस, यूनिक टूर एंड ट्रेवल्स, महाकाल ट्रेडर्स, मैक्स ट्रेडर्स, बालाजी ट्रेडर्स और जय महाकाल टूर एंड ट्रेवल्स सहित अन्य फर्में शामिल हैं।

इन फर्मों के नाम से विभिन्न निजी बैंकों में खोले गए खातों के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन का पता चला है। पुलिस द्वारा सभी खातों के लेन-देन का विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। जांच आगे बढ़ने पर लेन-देन की वास्तविक राशि और नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों की जानकारी सामने आने की संभावना है।

फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया की भी जांच

पुलिस अब केवल गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका तक सीमित नहीं है। फर्जी फर्मों के पंजीयन और उनके नाम से बैंक खाते खोलने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्मों के पंजीयन और बैंक खातों को खोलने में किन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं की भूमिका रही। किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा आपराधिक संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

गिरफ्तार आरोपी

पुलिस ने मामले में धर्मेन्द्र नाहर, सोनू दांगी, अमित विश्वकर्मा, विपिन गिरी, स्वर्णेन्द्र पांडे और रिषभ पटेल को गिरफ्तार किया है।

वहीं सरमन उर्फ शुभम रैकवार और ऋषि केशव सिंह फरार बताए गए हैं। दोनों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

पुलिस की नागरिकों से अपील

सागर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या आसान कमाई के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी अथवा बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं।

किसी दूसरे व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता या फर्म खुलवाकर उसका संचालन किसी और को देना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी या अवैध गतिविधियों से प्राप्त रकम के लेन-देन में होने पर खाताधारक भी पुलिस जांच के दायरे में आ सकता है।

इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका

इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी मकरोनिया निरीक्षक नितिन पाल, थाना प्रभारी बहेरिया उपनिरीक्षक शशिकांत गुर्जर, चौकी प्रभारी बिलहेरा उपनिरीक्षक रामअवतार धाकड़, सउनि काशीराम ठाकुर, प्रआर. सौरभ रैकवार, साइबर सेल सागर के आरक्षक हेमेन्द्र ठाकुर, आरक्षक आशीष गौतम, प्रदीप शर्मा, आशीष यादव, मनीष तिवारी, शुभम, रघुराज सिंह, ब्रिजेश विश्वकर्मा, सैनिक राजेन्द्र ठाकुर तथा थाना शाहपुरा के उपनिरीक्षक हरीश, आरक्षक भानु प्रताप गुर्जर और बाबूलाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

Post a Comment

0 Comments