आज डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर का स्थापना दिवस है, डॉ. सर हरिसिंह गौर द्वारा 18 जुलाई 1946 को अपनी निजी संपत्ति से ₹20 लाख के दान के माध्यम से डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय की स्थापना की थी, इस अवसर पर कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने विश्वविद्यालय के संस्थापक महान शिक्षाविद, दानवीर, प्रसिद्ध विधिवेत्ता डॉक्टर सर हरीसिंह गौर की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की

 सागर / डॉ. सर हरिसिंह गौर द्वारा 18 जुलाई 1946 को अपनी निजी संपत्ति से ₹20 लाख के दान के माध्यम से डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। बाद में उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति (लगभग 2 करोड़ रुपये) भी इसी विश्वविद्यालय के लिए वसीयत कर दी थी । उस समय इसे 'सागर विश्वविद्यालय' कहा जाता था और यह मध्य प्रदेश का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है । अपनी स्थापना के समय यह देश का 18वां विश्वविद्यालय था। डॉ. गौर ने विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति (वाइस-चांसलर) के रूप में कार्य किया और शुरुआत में भूविज्ञान, प्राणीशास्त्र, और वनस्पति विज्ञान सहित 17 पाठ्यक्रम शुरू किए ।
आज डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर का स्थापना दिवस है । इस अवसर पर कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने विश्वविद्यालय के संस्थापक महान शिक्षाविद, दानवीर, प्रसिद्ध विधिवेत्ता डॉक्टर सर हरीसिंह गौर की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। विश्वविद्यालय स्थापना दिवस के अवसर पर कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी । पुष्पांजलि कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एस. पी. उपाध्याय, प्रो. चंदा बेन, प्रो. डी. के. नेमा, प्रो. के. के. एन. शर्मा, प्रो. अजीत जायसवाल, प्रो. नागेन्द्र दुबे, प्रो. यू.के. पाटिल, प्रो. ऋतू यादव, प्रो. ममता पटेल, प्रो. अस्मिता गजभिये, प्रो. रणवीर कुमार, प्रो. रत्नेश दास, डॉ. संजय शर्मा, डॉ. अभिषेक जैन, डॉ. मोहन टी. ए., सहायक कुलसचिव आर.के. पाल, सहायक कुलसचिव दीपक शाक्या, सहायक कुलसचिव आशीष तिवारी, डॉ. राकेश सोनी, राहुल गिरी गोस्वामी, सुहेल कुरैशी सहित विश्वविद्यालय के कई सेवानिवृत्त शिक्षकों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं शहर के गणमान्य नागरिकों ने गौर समाधि पर पुष्प अर्पित कर उनको नमन किया।




 

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