डॉ. गौर विश्वविद्यालय और जीवाजी विश्वविद्यालय के बीच होगा अकादमिक समझौता: कुलगुरु बनने के बाद पहली बार सागर पहुंचे प्रो. राजपूत

​सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के समाजशास्त्र एवं समाजकार्य विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष व डीन प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलगुरु (कुलपति) का पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार सागर का दौरा किया। सागर आगमन पर उन्होंने सबसे पहले विश्वविद्यालय स्थित गौर समाधि, गौर मूर्ति, शहर के तीनबत्ती स्थित डॉ. गौर प्रतिमा तथा गौर अध्ययन केंद्र पहुंचकर डॉ. हरीसिंह गौर को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

​इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रभारी कुलपति प्रो. वर्षा शर्मा की अध्यक्षता में एक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित कर प्रो. राजपूत का शाल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया गया।

​गौरवशाली क्षण और अकादमिक सहयोग पर जोर

  • ​सांझा अकादमिक समझौता: प्रो. राजपूत ने घोषणा की कि शीघ्र ही डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय और जीवाजी विश्वविद्यालय के बीच एक शैक्षणिक समझौता (MoU) होगा। इससे दोनों संस्थानों को अकादमिक, शोध और प्रशासनिक क्षेत्रों में परस्पर सहयोग मिलेगा।
  • ​डॉ. गौर को दिया सफलता का श्रेय: प्रो. राजपूत ने कहा, "मैं आज जो कुछ भी हूँ, वह डॉ. गौर की प्रेरणा और आशीर्वाद का परिणाम है। पदभार संभालते ही मैंने सबसे पहले अपने कुलगुरु कक्ष में डॉ. गौर की प्रतिमा स्थापित की। जीवाजी विश्वविद्यालय में भी उन्हें बेहद श्रद्धा से याद किया जाता है।"
  • ​कुलपति ने दी बधाई: प्रभारी कुलपति प्रो. वर्षा शर्मा ने प्रो. राजपूत को शुभकामनाएं देते हुए उनके मिलनसार व्यक्तित्व की सराहना की और दोनों विश्वविद्यालयों के बीच निरंतर संवाद व सहयोग का भरोसा दिलाया।

​वरिष्ठ अधिकारी व प्राध्यापक रहे मौजूद

​कार्यक्रम और श्रद्धांजलि सभा के दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एस.पी. उपाध्याय, प्रो. आशीष वर्मा, प्रो. राजेंद्र यादव, प्रो. अजीत जायसवाल, प्रो. अनिल जैन, प्रो. यू.के. पाटिल, प्रो. नागेश दुबे, प्रो. रश्मि सिंह, प्रो. अष्मिता गजभिये, प्रो. एम.एस. पाहवा, उपकुलसचिव सतीश कुमार, दीपक शाक्य, डॉ. पंकज तिवारी सहित अनेक शिक्षक व अधिकारी उपस्थित रहे।

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